मासिक शिवरात्रि पर गौरी योग का महासंयोग, भोलेनाथ की कृपा पाने का दुर्लभ अवसर

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सनातन धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। इस बार मासिक शिवरात्रि पर गौरी योग का शुभ संयोग बनने से इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त कृपा प्राप्त करने के लिए यह दिन अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। मान्यता है कि इस शुभ योग में की गई पूजा, जप और रुद्राभिषेक से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।

अधिक मासिक शिवरात्रि कब है?

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 13 जून, शनिवार के दिन शाम को 4 बजकर 8 मिनट पर होगा। वहीं, अगले दिन यानी 14 जून, रविवार को दोपहर के 12 बजकर 20 मिनट तक चतुर्दशी तिथि व्याप्त रहेगी इसके बाद अमावस्या तिथि आरंभ हो जाएगी। मासिक शिवरात्रि पर शाम की पूजा का अधिक महत्व होता है। ऐसे में अधिक मास की मासिक शिवरात्रि 13 जून को मनाई जाएगी।

गौरी योग को वैवाहिक सुख, पारिवारिक खुशहाली और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से अविवाहित युवक-युवतियां मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए इस दिन व्रत और पूजा करते हैं। वहीं विवाहित महिलाएं अपने दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना के लिए भगवान शिव और माता गौरी की आराधना करती हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक शिवरात्रि की रात्रि में शिवलिंग का जल, दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही बेलपत्र, धतूरा, भांग और सफेद पुष्प अर्पित कर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। भक्त रात्रि जागरण कर भगवान शिव का ध्यान भी करते हैं।

ज्योतिषीय दृष्टि से यह योग आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। कई श्रद्धालु इस अवसर पर शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक का आयोजन करते हैं। माना जाता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से की गई उपासना जीवन की बाधाओं को दूर करने में सहायक होती है।

मासिक शिवरात्रि पर क्या करें?

  • भगवान शिव और माता गौरी की विधिवत पूजा करें।
  • शिवलिंग पर जल, दूध और गंगाजल से अभिषेक करें।
  • बेलपत्र और सफेद पुष्प अर्पित करें।
  • ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।
  • जरूरतमंदों को दान-पुण्य करें।
  • रात्रि में शिव भजन और ध्यान करें।

प्रमुख लाभ

  • वैवाहिक जीवन में सुख और सामंजस्य।
  • मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए शुभ।
  • आर्थिक और पारिवारिक समस्याओं में राहत।
  • मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति।
  • भगवान शिव और माता गौरी की कृपा प्राप्त होने की मान्यता।

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