सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। इस पूरे महीने में आने वाले सावन सोमवार का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने तथा व्रत रखने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है और अविवाहित लोगों को योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
सावन सोमवार व्रत विधि
- श्रावण मास के पहले सोमवार के दिन व्रती को सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करके साफ वस्त्र धारण कर लेने चाहिए। व्रत के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करना उत्तम माना गया है।
- नित्य कर्म करने के बाद पूजा घर को अच्छी तरह साफ करना चाहिए और वहां, शिवजी व माता पार्वती की प्रतिमा अवश्य स्थापित करें। इसके बाद सबसे पहले हाथ में थोड़ा सा जल लेकर मन में शिवजी का स्मरण करते हुए सावन सोमवार व्रत संकल्प लें और कहें कि ‘मैं विधिवत इस व्रत को करूंगा, शिवजी मुझपर प्रसन्न हों’।
- शिवजी का अभिषेक करने के बाद विधिपूर्वक माता पार्वती और शिवजी की पूजा-आरती करें। व्रती को इस दिन पूजा के बाद व्रत कथा भी अवश्य सुननी चाहिए। मान्यता है कि इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
- चारों सोमवार के दिन इसी प्रकार व्रत का संकल्प लेकर व्रत शुरू करना चाहिए। पूजा के बाद व्रती को तीसरा प्रहर खत्म होने तक व्रत करना चाहिए।
- शाम को दोबारा शिवजी की पूजा और उन्हें भोग लगाने के बाद ही भोजन करना चाहिए। मान्यता है कि सोमवार व्रत को जमीन पर शयन करना चाहिए। हालांकि, ऐसा संभव न हो तो आप पलंग पर सो सकते हैं।
- इस बार सावन में 4 सोमवार पड़े हैं। ऐसे में हर सोमवार को इसी विधि के साथ अपने व्रत को पूर्ण करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से पूरे वर्ष के सभी सोमवार व्रत के समान फल की प्राप्ति होती है।
सावन सोमवार व्रत के नियम
- व्रती को पूरे सावन सात्विक भोजन का सेवन करना चाहिए। इस दौरान तामसिक भोजन लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा आदि का सेवन करना अशुभ माना जाता है।
- सावन के दौरान व्रती और परिवार के सदस्यों को भी बैंगन और कढ़ी नहीं खानी चाहिए। मान्यता है की श्रावण मास में दूध शिवजी को अर्पित किया जाता है। ऐसे में इससे बनी किसी भी चीज का सेवन नहीं करना चाहिए।
- व्रती को सावन सोमवार व्रत में किसी भी प्रकार के नकारात्मक, लालच, क्रोध, घृणा आदि भावनाओं से बचना चाहिए। इस दौरान केवल मन को शांत रखें और शिवजी का ध्यान रखें।
- भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है। ऐसे में शिव पूजन को दौरान शिवजी का अभिषेक करते समय उन्हें बेलपत्र अर्पित करना बिल्कुल भी न भूलें।
- सावन सोमवार व्रत के दिन किसी भी अनैतिक कार्य से बचना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करें। इस दिन व्रत के दौरान शयन करना अच्छा नहीं माना जाता है।
सावन सोमवार व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार का व्रत करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। यह व्रत सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य, मानसिक शांति और परिवार की खुशहाली के लिए किया जाता है। अविवाहित युवक-युवतियां योग्य जीवनसाथी की कामना से तथा विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए भी यह व्रत रखती हैं।
नोट: व्रत और पूजा से जुड़ी मान्यताएं धार्मिक परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में पूजा-विधि में कुछ भिन्नताएं हो सकती हैं।