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कथाएँ

श्री सत्य नारायण व्रत कथा

सत् नारायण भगवान (Satyanarayan) की कथा का उल्लेख स्कंद पुराण (Skand Puran) के विवाह खंड में किया गया है. ऐसा माना जाता है कि ये कथा करने वाले व्यक्ति के सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं. साथ ही यह कथा अनेकों प्रकार से अपनी उपयोगिता भी सिद्ध करती…
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माँ वैष्णो देवी की सम्पूर्ण जन्म कथा

हमारे हिन्दू महाकाव्यों में माता वैष्णो देवी और माता दुर्गा की उत्पत्ति की व्याख्या लगभग एक समान वर्णन है जिस कारण भक्तों के मन में इन दोनों देवियों के अंतर को जानने की जिज्ञासा होती है। माता वैष्णो देवी और माता दुर्गा की उत्त्पति की वर्णन…
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संतोषी माता की व्रत कथा

हमारे धार्मिक ग्रथों में शुक्रवार का दिन संतोषी माता की पूजा के लिए निर्धारित है। आसानी से प्रसन्न होने वाली संतोषी माता का व्रत हर तरह से गृहस्थी को धन-धान्य, पुत्र, अन्न-वस्त्र से परिपूर्ण रखता है और मां अपने भक्त को हर कष्ट से बचाती हैं।…
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श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत कथा

जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है. भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्मटी के दिन श्री कृष्ण का जन्म हुआ था. श्री कृष्ण का जन्म मथुरा की कारागर में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. जब भाद्रपद मास की अष्टमी के दिन…
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श्रीकृष्ण के जन्म की कथा

आज पूरे देश में धूमधाम से श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इसी…
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मंगलवार व्रत की कथा

मंगलवार के दिन हनुमान जी की आराधना उत्तम मानी गई है। आज के दिन व्रत रखते हुए हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए और मंगलवार व्रत की कथा अवश्य पढ़नी चाहिए। हनुमान जी प्रसन्न होकर अपने भक्तों की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं। मंगलवार व्रत की…
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श्री बृहस्पति देव की व्रत कथा

अगर कोई व्यक्ति गुरुवार के दिन बृहस्पति का व्रत करता है तो उसे पीड़ा से मुक्ति मिल जाती है। बृहस्पति जी को प्रार्थना या भक्ति का स्वामी भी माना गया है। इन्हें ब्राह्मनस्पति तथा देवगुरु भी कहा जाता है। शील और धर्म के अवतार माने जाने वाले…
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संकष्टी चतुर्थी की पौराणिक कथा

यह पर्व फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवसर पर भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना और व्रत करने से साधक को सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी…
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माँ गायत्री की व्रत कथा

गंगा दशहरा के अगले दिन यानी ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को गायत्री जयंती मनायी जाती है। हालांकि कुछ जगहों पर गंगा दशहरा और गायत्री जयंती की तिथि ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को माना जाता है। इतना ही नहीं, श्रावण पूर्णिमा…
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नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना कैसे हुई? जानें यहाँ

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग द्वादश ज्योतिर्लिंग में 10वां स्थान नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का आता है.  शिव पुराण के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन 12 ज्योतिर्लिंग के स्मरण मात्र से व्यक्ति के हर कष्ट दूर हो जाते हैं. द्वादश ज्योतिर्लिंग में 10वां स्थान…
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