माता बगलामुखी की रहस्यमयी कथा

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माता बगलामुखी दस महाविद्याओं में से एक अत्यंत शक्तिशाली देवी मानी जाती हैं। उन्हें पीताम्बरा देवी भी कहा जाता है, क्योंकि उनका प्रिय रंग पीला है। तंत्र साधना, शत्रु शमन, न्यायिक विजय और वाणी पर नियंत्रण के लिए इनकी उपासना विशेष मानी जाती है। उनकी कथा रहस्य, शक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरी हुई है।

माता बगलामुखी दस महाविद्याओं में से एक हैं। उन्हें पीताम्बरा, स्तम्भन शक्ति और मौन विजय की अधिष्ठात्री भी कहा जाता है। उन्हें हाथ में गदा (शक्ति) और जीभ पकड़े हुए दिखाया जाता है। उनका स्वरूप वाणी पर नियंत्रण, शत्रु को मौन कर देना और विचारों और चित्त पर विजय पा लेने का प्रतीक है। माता बगलामुखी से जुड़ी एक बेहद दिलचस्प कथा है, जो उनके स्वरूप की व्याख्या करता है। तो, चलिए जानते हैं ये कथा…

माता बगलामुखी की पौराणिक कथा
कथा के अनुसार, सृष्टि में एक बार भयंकर प्रलय आया। चारों ओर तेज हवाएं, भयंकर वर्षा, भूकंप और प्रकृति का संतुलन बिगड़ चुका था। सभी देवी-देवता चिंतित हो उठे और सृष्टि को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने ध्यान किया। ध्यान में भगवान विष्णु को संदेश मिला कि यह प्रलय केवल माँ बगलामुखी की कृपा से ही रोका जा सकता है। भगवान विष्णु ने कठोर तप कर हिमालय क्षेत्र में हरिद्रा सरोवर (हल्दी से बना पवित्र जल) के तट पर साधना की। तप से प्रसन्न होकर माँ बगलामुखी पीताम्बरा रूप में प्रकट हुईं। उनकी कान्ति हल्दी के समान पीली, वस्त्र पीले और हाथों में शत्रु की जीभ पकड़ने का संकेत था।

कहा जाता है कि एक समय ब्रह्मांड में भयंकर तूफान उठा। प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया, और सृष्टि विनाश की ओर बढ़ने लगी। देवता घबरा कर भगवान विष्णु के पास पहुंचे। विष्णु ने हरिद्रा सरोवर (हल्दी के सरोवर) में तप किया। उसी तप से एक तेजस्वी देवी प्रकट हुईं — वही थीं माता बगलामुखी

देवी ने प्रकट होते ही उस प्रचंड तूफान की गति रोक दी। उनकी शक्ति थी “स्तंभन शक्ति” — यानी गति, वाणी या शत्रु की शक्ति को स्थिर कर देना। इसी कारण उन्हें शत्रुओं की वाणी और बुद्धि को नियंत्रित करने वाली देवी माना जाता है।

एक अन्य कथा में एक राक्षस था, मदनासुर, जिसे वरदान मिला था कि जो भी वह बोलेगा, वह सच हो जाएगा। उसने अपनी वाणी से सृष्टि को संकट में डाल दिया। तब देवी बगलामुखी ने प्रकट होकर उसकी जीभ पकड़ ली और उसकी शक्ति निष्क्रिय कर दी। यही कारण है कि देवी की मूर्ति में वे शत्रु की जीभ पकड़ते हुए दिखाई देती हैं।

पूजा की विशेषताएँ

  • पीले वस्त्र पहनना शुभ

  • हल्दी की माला से मंत्र जप

  • पीले फूल और बेसन/चना दाल का भोग

  • रात्रि साधना और एकाग्रता महत्वपूर्ण

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