गायत्री मंत्र का 108 बार जाप

गायत्री मंत्र का 108 बार जाप: मन, बुद्धि और आत्मा की शुद्धि का मार्ग

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गायत्री मंत्र को वेदों का सार और सनातन धर्म का अत्यंत पवित्र मंत्र माना जाता है। “ॐ भूर्भुवः स्वः, तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि, धियो यो नः प्रचोदयात्” — यह मंत्र सूर्यदेव की उपासना के साथ-साथ बुद्धि और विवेक को जाग्रत करने की प्रार्थना है। गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है और इसे आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण अंग कहा गया है।

108 की संख्या का सनातन परंपरा में विशेष महत्व है। जपमाला में 108 मनके होते हैं, जो इंद्रियों, नक्षत्रों और ब्रह्मांडीय संतुलन से जुड़े माने जाते हैं। गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करने से साधक का मन एकाग्र होता है, विचार शुद्ध होते हैं और आत्मिक ऊर्जा का संचार होता है। यह जाप नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक सोच को मजबूत करता है।

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