शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा

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शुक्रवार का दिन संतोषी माता को समर्पित माना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा किया जाता है ताकि परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और संतोष बना रहे। इस व्रत को करने से माता संतोषी प्रसन्न होती हैं और घर में अन्न-धन की वृद्धि होती है।

व्रत की विधि

  • शुक्रवार की सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।

  • घर के मंदिर या पूजा स्थल में संतोषी माता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

  • माता को गुड़ और चने का भोग अर्पित करें।

  • धूप, दीप और अगरबत्ती जलाकर माता की पूजा करें।

  • व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।

  • व्रत के दिन खट्टे पदार्थों का सेवन न करें।

  • कथा के पश्चात सभी को गुड़-चना प्रसाद स्वरूप वितरित करें।

व्रत कथा
एक समय की बात है, एक गरीब महिला का बेटा रोज़ग़ार की तलाश में बाहर गया। जाते समय उसने माँ से कहा कि वह जल्द लौटेगा। यात्रा के दौरान उसने देखा कि लोग शुक्रवार को संतोषी माता का व्रत कर रहे हैं। उसने भी यह व्रत प्रारंभ किया। माता संतोषी की कृपा से उसे शीघ्र ही धन, सम्मान और सफलता प्राप्त हुई। वह घर लौटा और माँ को भी व्रत का महत्व बताया। माँ ने भी व्रत करना शुरू किया। धीरे-धीरे उनके परिवार की गरीबी और कष्ट दूर हो गए और उनके घर में सुख, शांति और संतोष का वास होने लगा।

संतोषी माता व्रत से जीवन में संतोष, सुख-समृद्धि, वैवाहिक सुख और परिवार में एकता प्राप्त होती है। यह व्रत खासकर उन महिलाओं के लिए फलदायी माना जाता है जो अपने परिवार में प्रेम और सौहार्द्र चाहती हैं।

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