क्यों मनाई जाती है हरतालिका तीज?

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हरतालिका तीज हिंदू धर्म का एक प्रमुख व्रत है, जिसे खासकर महिलाएं मनाती हैं। यह व्रत पति की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि के लिए रखा जाता है। इसमें उपवास, पूजा और भगवान शिव-पार्वती की आराधना की जाती है। हरतालिका तीज हिंदू धर्म का एक प्रमुख व्रत है, जिसे खासकर महिलाएं मनाती हैं। यह व्रत पति की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि के लिए रखा जाता है। इसमें उपवास, पूजा और भगवान शिव-पार्वती की आराधना की जाती है। मान्यता है कि माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। हरतालिका तीज का व्रत उसी तपस्या की याद में किया जाता है। यह व्रत स्त्रियों को समर्पण और श्रद्धा का प्रतीक बताता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन की कथा सुनाई जाती है। माना जाता है कि इसी दिन माता पार्वती को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। इसलिए यह दिन वैवाहिक जीवन में प्रेम और समर्पण का प्रतीक है।

महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और दिनभर भोजन या पानी ग्रहण नहीं करतीं। उनका विश्वास है कि इस व्रत से पति का जीवन लंबा और दांपत्य जीवन सुखमय बनता है। यह पति-पत्नी के रिश्ते को और मजबूत करता है।
कुवांरी लड़कियां भी यह व्रत करती हैं ताकि उन्हें अपनी पसंद का आदर्श जीवनसाथी मिले। वहीं विवाहित महिलाएं इस व्रत से अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद मांगती हैं। यह व्रत स्त्री के सुहाग और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है।
इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, मेहंदी लगाती हैं और माता पार्वती-शिव की मूर्ति की मिट्टी से स्थापना करती हैं। रातभर जागरण और भजन-कीर्तन करके पूजा की जाती है। यह भक्तिभाव और आस्था को गहराई से दर्शाता है।
हरतालिका तीज महिलाओं के एक साथ आने और उत्सव मनाने का अवसर है। इसमें गीत-संगीत, सजधज और आपसी मेलजोल से समाज में अपनत्व और एकता की भावना मजबूत होती है। यह त्योहार न सिर्फ धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

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