कब है धनतेरस का शुभ मुहूर्त, आज किस समय खरीदें सोना-चांदी

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धनतेरस का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है। दीपावली की शुरूआत धनतेरस से ही होती है। इसको धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। शनिवार को इस बार धनतेरस मनाई जाएगी। दीपावली और धनतेरस की तैयारी भी चल रही है। बाजार दीप और अन्य सामग्रियों से पटी हुई है। धनतेरस को आरोग्य, दीर्घायु और धन – समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ था, इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है। भारत सरकार ने धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। धन्वन्तरि देवताओं के चिकित्सक हैं और चिकित्सा के देवता माने जाते हैं, इसलिए चिकित्सकों के लिए धनतेरस का दिन बहुत ही महत्व पूर्ण होता है।

आचार्य धर्मेंद्र झा ने बताया कि शास्त्रों में वर्णन है कि इसी दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान कुबेर और यमराज की आराधना भी की जाती है। कहा जाता है कि कुबेर की पूजा से धन और सौभाग्य मिलता है और यमराज की पूजा अकाल मृत्यु से रक्षा करती है।

शाम में यमराज की पूजा का विशेष महत्व है। दक्षिण दिशा को यम की दिशा कहा गया है। प्रदोष काल में घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिणमुख होकर अन्न की ढ़ेरी पर चारमुखी तेल का दीपक जलाया जाता है। यह दीपक यमराज को समर्पित माना जाता है। आचार्य धर्मेंद्र ने बताया कि दीपक जलाते समय प्रार्थना करें की वे अपने परिवार को दीर्घायु और सुरक्षा का आशीर्वाद दें और किसी की अकाल मृत्यु न हो।

धनतेरस के दिन की पूजा विधि

  • धनतेरस के दिन शाम के वक्त शुभ मुहूर्त में उत्तर की ओर कुबेर और धन्वंतरि की स्थापना करें।
  • साथ ही मां लक्ष्मी, गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। इसके बाद दीप जलाकर पूजा करें।
  • तिलक करने के बाद पुष्प, फल आदि का भोग लगाएं।
  • कुबेर देवता को सफेद मिठाई और धन्वंतरि देव को पीली मिठाई का भोग लगाएं।
  • पूजा के दौरान ‘ऊँ ह्रीं कुबेराय नमः’ इस मंत्र का जाप करते रहें।
  • भगवान धन्वंतरि को प्रसन्न करने के लिए इस दिन धन्वंतरि स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
  •  धनतेरस के दिन से दिवाली मनाई जाती है और देवी लक्ष्मी के स्वागत की तैयारी की जाती है। लक्ष्मी के चरणों की निशानी के रूप में रंगोली से लेकर घर के अंदर तक छोटे-छोटे पैरों के निशान बनाए जाते हैं। शाम को 13 दीये जलाकर लक्ष्मी की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन लक्ष्मी पूजा से समृद्धि, सुख और सफलता मिलती है।
संबंधित अन्य नाम धनत्रयोदशी, धन्वन्तरि त्रयोदशी, धन्वन्तरि जयन्ती, धन्य तेरस, ध्यान तेरस
शुरुआत तिथि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी
कारण माता लक्ष्मी
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