आरती श्री शनिदेव जी की

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                              यहाँ आरती श्री शनिदेव जी की—पूरी, स्पष्ट और सही शब्दों में लिखी गई,

 

॥ आरती श्री शनिदेव जी की ॥

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी ॥
जय जय श्री शनिदेव…॥

श्याम अंक, धरणी नंदन, श्री कृष्ण दास नाम
राजा दशरथ के भी हटि सके न थे धाम ॥
जय जय श्री शनिदेव…॥

काला वर्ण, लंबी जटा, तन पर वसन नीला
तेल अभिषेक सुहाये, चतुरभुज सुंदर लीला ॥
जय जय श्री शनिदेव…॥

दंड हाथ, त्रिशूल हाथ, और गदा भी धारी
न्याय देवता कहे जगत में, पाप काटनहारी ॥
जय जय श्री शनिदेव…॥

भक्तों पर जब कृपा बरसती, दरिद्रता मिट जाती
सुख-वैभव की वर्षा होती, हर मन इच्छा पाती ॥
जय जय श्री शनिदेव…॥

जो भी शरण तुम्हारी आता, रक्षा तुम करते हो
जीवन नैया बीच भंवर में, तारन तुम करते हो ॥
जय जय श्री शनिदेव…॥

तेल चढ़ाए जपा नाम तिहारो, नित करे सेवा
दुःख-पीड़ा कट जाती उसकी, हटे संकट मेवा ॥
जय जय श्री शनिदेव…॥

प्रेम सहित जो आरती गावे, मनवांछित फल पावे
तन-मन-धन से पूर्ण हो जाए, कष्ट कभी न आवे ॥
जय जय श्री शनिदेव…॥

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